अपने नागरिकों के हत्यारे के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति: डोनाल्ड ट्रंप
- Advocate Sandeep Pandey
- 5 days ago
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अमेरिका भारत को रूस के साथ व्यापार और रणनीतिक संबंधों पर उपदेश देता है, जबकि खुद अपने हितों के लिए पाकिस्तान जैसे देश के साथ दशकों तक सैन्य, आर्थिक और कूटनीतिक संबंध बनाए रखता रहा है।
पाकिस्तान ने हजारों अमेरिकी नागरिकों की जान लेने वाले ओसामा बिन लादेन को सालों तक शरण दी। वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए हमलों में मारे गए निर्दोष अमेरिकियों के बावजूद अमेरिका ने पाकिस्तान के साथ अपने संबंध पूरी तरह खत्म नहीं किए।
भारत के लिए पाकिस्तान केवल एक पड़ोसी देश नहीं, बल्कि सीमा पार आतंकवाद, घुसपैठ और राष्ट्रीय सुरक्षा पर लगातार मंडराता खतरा है। यही पाकिस्तान अमेरिका के लिए भी वही है, जिसने उसके नागरिकों की हत्या करने वाले आतंकी को पनाह दी।
अंतरराष्ट्रीय कानून और राज्य संप्रभुता (State Sovereignty) का मूल सिद्धांत यही कहता है कि हर राष्ट्र को अपने राष्ट्रीय हितों, सुरक्षा आवश्यकताओं और आर्थिक प्राथमिकताओं के अनुसार विदेश नीति तय करने का अधिकार है।
यदि अमेरिका अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर पाकिस्तान जैसे देश के साथ संबंध बनाए रख सकता है, तो भारत को भी अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर रूस या किसी अन्य देश के साथ व्यापार, रक्षा सहयोग और रणनीतिक साझेदारी करने का पूरा अधिकार है।
अमेरिका में बनी बंदूकों से कश्मीर में आतंकवादी हत्या कर रहे हैं, लेकिन भारत या रूस में बने किसी भी हथियार से कभी अमेरिका पर कोई आतंकवादी हमला नहीं हुआ। इसके बावजूद वही अमेरिका भारत पर टैरिफ की गीदड़भभकी देता है और यूक्रेन में हथियार भेजकर हजारों रूसियों की मौत का कारण बनता है।
ऐसे में जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद को नोबेल पीस का दावेदार बताते हैं, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या अमेरिका के पास अपने नागरिकों, अपने सिद्धांतों और अपनी नैतिक जिम्मेदारी के लिए वास्तव में कोई आत्मविश्वास बचा भी है?
भारत की विदेश नीति वॉशिंगटन, मॉस्को या किसी अन्य राजधानी से नहीं, बल्कि नई दिल्ली से तय होगी।
राष्ट्रहित सर्वोपरि है।





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