ताजमहल 'तेजो महालय' विवाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट में सर्वे की मांग, 6 जुलाई को होगी सुनवाई
- Advocate Sandeep Pandey
- 6 days ago
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प्रयागराज, 4 जुलाई 2026: ताजमहल को लेकर एक बार फिर कानूनी विवाद इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया है। एक याचिका में दावा किया गया है कि ताजमहल वास्तव में 'भगवान श्री अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान तेजो महालय' मंदिर है। याचिकाकर्ताओं ने आगरा की निचली अदालतों द्वारा एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त कर सर्वे कराने से इनकार किए जाने के आदेशों को चुनौती दी है। मामले की सुनवाई 6 जुलाई 2026 को प्रस्तावित है।
क्या है मामला?
वर्ष 2015 में आगरा की सिविल अदालत में एक वाद दायर किया गया था, जिसमें ताजमहल को प्राचीन शिव मंदिर 'तेजो महालय' घोषित करने की मांग की गई।
वाद के दौरान याचिकाकर्ताओं ने स्मारक का निरीक्षण, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराने के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने का अनुरोध किया।
सिविल जज तथा बाद में अपर जिला न्यायाधीश ने इस मांग को अस्वीकार कर दिया।
अब इन्हीं आदेशों को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।
याचिकाकर्ताओं की प्रमुख दलीलें
याचिका में कहा गया है कि:
ताजमहल के भीतर मौजूद कुछ स्थापत्य एवं संरचनात्मक विशेषताओं की न्यायिक जांच आवश्यक है।
एएसआई के नियंत्रण में होने के कारण याचिकाकर्ता स्वयं फोटोग्राफी या निरीक्षण नहीं कर सकते।
केवल मौखिक साक्ष्य से विवादित तथ्यों का प्रभावी परीक्षण संभव नहीं है, इसलिए न्यायालय की निगरानी में सर्वे कराया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट से क्या मांग की गई है?
याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट से अनुरोध किया है कि—
आगरा की अदालतों के आदेश निरस्त किए जाएं।
एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त कर ताजमहल का निरीक्षण कराया जाए।
अंतरिम राहत के रूप में एएसआई को परिसर की तस्वीरें लेकर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया जाए।
वर्तमान कानूनी स्थिति
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अभी तक किसी दावे को सही या गलत नहीं माना है। फिलहाल अदालत के समक्ष केवल यह प्रश्न है कि क्या सर्वे के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किया जाए। ताजमहल के इतिहास या धार्मिक स्वरूप पर अभी कोई न्यायिक निष्कर्ष नहीं दिया गया है।
— एडवोकेट संदीप पांडे





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