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पेंशन खाते में जमा राशि भी हो सकती है कुर्क — जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय

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(लीगल कॉलम)

✍️ अधिवक्ता संदीप पांडेय के दृष्टिकोण से

पेंशन खाते में जमा राशि भी हो सकती है कुर्क — जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय

जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि पेंशन राशि को कानूनी सुरक्षा केवल तब तक प्राप्त है, जब तक वह भुगतान प्राधिकरण के पास रहती है। जैसे ही यह राशि पेंशनभोगी के बैंक खाते में जमा हो जाती है, वह सामान्य धनराशि की तरह मानी जाएगी और उसे ऋण वसूली के लिए अटैच (कुर्क) किया जा सकता है।

मामले में एक सेवानिवृत्त कर्मचारी ने बैंक द्वारा उसके खाते से राशि काटे जाने को चुनौती दी थी। वह एक ऋण का गारंटर था और मुख्य उधारकर्ता द्वारा भुगतान न करने पर बैंक ने उसकी पेंशन खाते से वसूली की कार्रवाई की। याचिकाकर्ता का तर्क था कि पेंशन कानून के तहत संरक्षित है और उस पर कोई कुर्की नहीं हो सकती।

हाईकोर्ट ने इस तर्क को अस्वीकार करते हुए कहा कि पेंशन की वैधानिक सुरक्षा भुगतान से पहले तक सीमित है। जैसे ही राशि खाते में जमा हो जाती है, वह “प्राप्त” मानी जाती है और फिर उस पर गारंटर की देनदारी लागू हो सकती है।

न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि गारंटर की जिम्मेदारी उधारकर्ता के समान होती है और बैंक को वसूली के लिए पहले उधारकर्ता के खिलाफ ही कार्रवाई करने की बाध्यता नहीं है।

⚖️ कानूनी विश्लेषण (Adv. Sandeep Pandey)

यह निर्णय गारंटर बनने के जोखिमों को उजागर करता है। आमतौर पर लोग सामाजिक या पारिवारिक संबंधों के कारण बिना सोचे-समझे गारंटर बन जाते हैं, परंतु कानून में यह एक पूर्ण वित्तीय दायित्व है।

पेंशन को जीवनयापन का साधन मानकर विशेष सुरक्षा दी गई है, परंतु न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि यह सुरक्षा पूर्ण नहीं है। यदि व्यक्ति ने स्वयं किसी अनुबंध के तहत जिम्मेदारी ली है, तो उसकी पेंशन से भी वसूली संभव है।

📌 निष्कर्ष

यह फैसला सभी पेंशनभोगियों के लिए एक चेतावनी है कि वे किसी भी ऋण में गारंटर बनने से पहले उसके कानूनी परिणामों को भली-भांति समझ लें।

(अधिक जानकारी व कानूनी सलाह हेतु: www.advpandey.com)

 
 
 

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