top of page

बीमा को वास्तविक जीवन की परिस्थितियों को ध्यान में रखना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट ने दुर्घटना पीड़ित को ₹50 लाख की एकमुश्त क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया



सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि बीमा दावों का आकलन करते समय केवल तकनीकी नियमों या कागजी गणनाओं पर निर्भर नहीं रहा जा सकता। न्यायालय ने एक गंभीर सड़क दुर्घटना में स्थायी रूप से प्रभावित हुए पीड़ित को ₹50 लाख की एकमुश्त क्षतिपूर्ति (Lump Sum Compensation) प्रदान करते हुए कहा कि बीमा व्यवस्था का उद्देश्य वास्तविक जीवन में हुए नुकसान की भरपाई करना है।

न्यायालय ने कहा कि गंभीर दुर्घटनाओं के कारण पीड़ित व्यक्ति को जीवनभर शारीरिक, मानसिक और आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे मामलों में केवल चिकित्सा खर्च ही नहीं, बल्कि भविष्य की देखभाल, पुनर्वास, आय की हानि, जीवन की गुणवत्ता में कमी और गरिमापूर्ण जीवन जीने के अधिकार को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि "न्यायसंगत और उचित क्षतिपूर्ति" (Just Compensation) मोटर वाहन कानून का मूल उद्देश्य है। इसलिए न्यायालयों और बीमा कंपनियों को मुआवजा तय करते समय मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए तथा पीड़ित की वास्तविक आवश्यकताओं का मूल्यांकन करना चाहिए।

निर्णय का महत्व

  • बीमा दावों के मूल्यांकन में मानवीय दृष्टिकोण को प्राथमिकता।

  • गंभीर रूप से घायल या दिव्यांग हुए पीड़ितों की भविष्य की जरूरतों को महत्व।

  • तकनीकी आपत्तियों के बजाय न्यायपूर्ण क्षतिपूर्ति के सिद्धांत को बढ़ावा।

  • बीमा कंपनियों को सामाजिक उत्तरदायित्व निभाने का संदेश।

निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय उन सभी दुर्घटना पीड़ितों के लिए महत्वपूर्ण है जो गंभीर चोटों या स्थायी विकलांगता के कारण लंबे समय तक कठिनाइयों का सामना करते हैं। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि बीमा का उद्देश्य केवल अनुबंध की शर्तों का पालन करना नहीं, बल्कि पीड़ित को उसके वास्तविक नुकसान के अनुरूप न्यायपूर्ण राहत प्रदान करना है।

— एडवोकेट संदीप पांडे


 
 
 

Comments


Gopal Nagar,3rd Bus Stop, Nagpur -440022

Call : 0091-9372390048

Whatsapp 9372390048

© 2023 by

Advisor & co.

Proudly created by Advocate Sandeep Pandey

  • facebook
  • Twitter Clean
  • Instagram
  • Blogger
bottom of page