वैवाहिक विवाद के कारण पति के हर रिश्तेदार पर 498A नहीं लगाया जा सकता : मद्रास हाईकोर्ट
- Advocate Sandeep Pandey
- Jun 15
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वेबसाइट: www.advpandey.com
हाल ही में मद्रास हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा है कि केवल वैवाहिक विवाद (Matrimonial Discord) होने के कारण पति के प्रत्येक रिश्तेदार के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 498A के तहत आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। यदि आरोप सामान्य, अस्पष्ट (Vague) और बिना किसी ठोस साक्ष्य के हों, तो रिश्तेदारों को केवल पारिवारिक संबंध के आधार पर अभियोजन का सामना करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
मामला क्या था?
पत्नी ने अपने पति तथा उसके कई रिश्तेदारों के विरुद्ध क्रूरता, उत्पीड़न और अन्य आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। जांच के बाद पुलिस ने पति के साथ-साथ उसके रिश्तेदारों के विरुद्ध भी आरोपपत्र दाखिल कर दिया। रिश्तेदारों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि उनके विरुद्ध कोई विशिष्ट आरोप नहीं हैं और उन्हें केवल पति का रिश्तेदार होने के कारण मामले में शामिल किया गया है।
हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ
न्यायालय ने कहा कि:
आपराधिक कानून का उपयोग केवल वैवाहिक असहमति या पारिवारिक तनाव के कारण नहीं किया जा सकता।
पति के हर रिश्तेदार को स्वतः आरोपी नहीं बनाया जा सकता।
धारा 498A के अंतर्गत मुकदमा चलाने के लिए प्रत्येक आरोपी के विरुद्ध स्पष्ट, विशिष्ट और विश्वसनीय आरोप होना आवश्यक है।
"उन्होंने पति का साथ दिया" या "मानसिक प्रताड़ना दी" जैसे सामान्य आरोप मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
पति के विरुद्ध कार्यवाही जारी
हाईकोर्ट ने पाया कि पति के विरुद्ध लगाए गए कुछ आरोप प्रथम दृष्टया विचारणीय (Triable) हैं, इसलिए उसके खिलाफ मुकदमा जारी रहेगा। लेकिन अन्य रिश्तेदारों के विरुद्ध आरोप केवल सामान्य और अस्पष्ट थे, इसलिए उनके खिलाफ कार्यवाही रद्द कर दी गई।
कानूनी महत्व
यह निर्णय उन मामलों में महत्वपूर्ण है जहाँ वैवाहिक विवाद के दौरान पूरे परिवार को एक साथ आरोपी बना दिया जाता है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि कानून का उद्देश्य वास्तविक पीड़ित को न्याय दिलाना है, न कि पारिवारिक प्रतिशोध का साधन बनना। प्रत्येक आरोपी की व्यक्तिगत भूमिका और कथित कृत्य का स्पष्ट उल्लेख आवश्यक है।
निष्कर्ष
मद्रास हाईकोर्ट का यह निर्णय न्यायपालिका के उस सतत दृष्टिकोण को मजबूत करता है कि धारा 498A महिलाओं को संरक्षण देने के लिए है, लेकिन इसका उपयोग बिना ठोस आधार के पति के सभी रिश्तेदारों को आपराधिक मुकदमे में घसीटने के लिए नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए वास्तविक आरोपों और सामान्य आरोपों के बीच अंतर करने पर बल दिया है।
— एडवोकेट संदीप पांडे



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