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न्यू इंडिया एश्योरेंस ने आंख की सर्जरी का मेडिक्लेम खारिज किया: कोर्ट ने ₹4 लाख देने का आदेश दिया


एक उपभोक्ता आयोग ने अहम फैसला देते हुए कहा है कि स्क्विंट (भेंगापन) आंख की सर्जरी कॉस्मेटिक नहीं बल्कि दृष्टि सुधार का इलाज है। आयोग ने बीमा कंपनी न्यू इंडिया एश्योरेंस को आदेश दिया कि वह बीमाधारक को ₹4.12 लाख का भुगतान करे।

मामले में बीमा कंपनी ने यह कहकर दावा खारिज कर दिया था कि स्क्विंट सर्जरी कॉस्मेटिक प्रक्रिया है और पॉलिसी में इसे कवर नहीं किया गया है। हालांकि, शिकायतकर्ता की ओर से प्रस्तुत डॉक्टर की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि यह सर्जरी दृष्टि सुधार, आंखों के समन्वय और रोजमर्रा के कामकाज में सुविधा के लिए चिकित्सकीय रूप से आवश्यक थी।

आयोग ने कहा कि केवल किसी उपचार को “कॉस्मेटिक” बताकर बीमा दावा खारिज नहीं किया जा सकता, जब चिकित्सा प्रमाण यह साबित करें कि सर्जरी मरीज की दृष्टि और जीवन-स्तर सुधारने के लिए जरूरी है।

आयोग ने बीमा कंपनी के रवैये को अनुचित मानते हुए दावा राशि के साथ मुआवजा देने का निर्देश दिया।

यह फैसला उन बीमाधारकों के लिए राहत है जिनके जरूरी इलाज को बीमा कंपनियां गलत तरीके से कॉस्मेटिक बताकर अस्वीकार कर देती हैं।


स्क्विंट आई सर्जरी कॉस्मेटिक नहीं, दृष्टि उपचार है: वलसाड उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला

वलसाड उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (CDRC) ने अहम निर्णय देते हुए कहा है कि स्क्विंट (भेंगापन) सुधार सर्जरी कॉस्मेटिक प्रक्रिया नहीं बल्कि दृष्टि उपचार है। आयोग ने न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी को आदेश दिया कि वह गुजरात के नवसारी जिले के बिलीमोरा निवासी को उसका खारिज किया गया मेडिक्लेम ₹4.12 लाख अदा करे। साथ ही इस राशि पर 8% ब्याज और मानसिक-शारीरिक पीड़ा के लिए ₹3,000 मुआवजा भी देने को कहा गया है।

🔹 बीमा दावा खारिज होने पर अभिभावक पहुंचे कोर्ट

शिकायतकर्ता ने 24 मार्च 2024 को न्यू इंडिया एश्योरेंस के बिलीमोरा शाखा से ₹10 लाख की मेडिक्लेम पॉलिसी ली थी, जो एक वर्ष के लिए वैध थी। इसी अवधि में सितंबर 2024 में उनकी बेटी की मुंबई के एक अस्पताल में राइट आई डाइवर्जेंट स्क्विंट सर्जरी कराई गई।

इलाज के बाद जब बीमा दावा प्रस्तुत किया गया तो कंपनी ने 1 अक्टूबर 2024 को यह कहकर दावा खारिज कर दिया कि यह सर्जरी कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट है और पॉलिसी के तहत कवर नहीं होती। इसके बाद अभिभावक ने 2 जनवरी 2025 को वलसाड CDRC में याचिका दायर की।

🔹 बीमा कंपनी ने क्षेत्राधिकार और कॉस्मेटिक क्लॉज का लिया सहारा

सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने तर्क दिया कि सर्जरी मुंबई में हुई है, इसलिए बिलीमोरा शाखा का क्षेत्राधिकार नहीं बनता। साथ ही कंपनी ने दावा किया कि स्क्विंट करेक्शन कॉस्मेटिक प्रक्रिया है, इसलिए मेडिक्लेम पॉलिसी में शामिल नहीं है और दावा खारिज करना सही था।

🔹 डॉक्टर की रिपोर्ट ने साबित की चिकित्सकीय जरूरत

शिकायतकर्ता के वकील ने कोर्ट के समक्ष डॉक्टर की विस्तृत रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में बताया गया कि सर्जरी का उद्देश्य दिखावट नहीं बल्कि दृष्टि सुधार था। इसमें आठ कारण बताए गए, जिनमें शामिल हैं—

  • पढ़ते या कंप्यूटर इस्तेमाल करते समय आंखों पर तनाव कम करना

  • आंखों के असंतुलन से होने वाले सिरदर्द को घटाना

  • संतुलन बेहतर करना

  • सीढ़ियों पर गिरने से बचाव

  • हाथ-आंख समन्वय में सुधार

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि मरीज को सर्जरी से एक महीने पहले लगातार स्क्विंट की समस्या हुई थी, यानी यह जन्मजात नहीं बल्कि एक चिकित्सकीय समस्या थी, जिसका समय पर इलाज जरूरी था।

🔹 आयोग ने बीमा कंपनी की दलीलें खारिज कीं

मेडिकल साक्ष्यों की समीक्षा के बाद वलसाड CDRC ने बीमा कंपनी की दलीलों को खारिज कर दिया। आयोग ने कहा कि जब स्क्विंट सर्जरी दृष्टि और रोजमर्रा के कामकाज सुधारने के लिए की जाती है, तो उसे कॉस्मेटिक नहीं माना जा सकता।

आयोग ने न्यू इंडिया एश्योरेंस को निर्देश दिया कि वह शिकायतकर्ता को ₹4.12 लाख पूरी राशि, उस पर 8% ब्याज और ₹3,000 का मुआवजा अदा करे।

✅ बीमाधारकों के लिए राहत भरा फैसला

यह फैसला उन बीमाधारकों के लिए बड़ी राहत है

जिनके जरूरी इलाज को बीमा कंपनियां गलत तरीके से “कॉस्मेटिक” बताकर खारिज कर देती हैं। आयोग का यह निर्णय भविष्य में विजन-रिलेटेड मेडिक्लेम मामलों में मिसाल बनेगा।





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