Legal Hire Unrepresented Case
- Advocate Sandeep Pandey
- 3 days ago
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एक विधिक उत्तराधिकारी के प्रतिस्थापन न होने से वाद स्वतः समाप्त नहीं होता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (12 जनवरी) को यह स्पष्ट किया कि मृत पक्षकार के किसी एक विधिक उत्तराधिकारी (लीगल हेयर) का प्रतिस्थापन न होने मात्र से वाद या अपील स्वतः समाप्त (अवसान/अभियोग की समाप्ति) नहीं मानी जा सकती, यदि मृत पक्षकार का हित अन्य विधिक उत्तराधिकारियों द्वारा समुचित रूप से प्रतिनिधित्व किया जा रहा हो।
न्यायमूर्ति मनोज मिश्र और उज्जल भुइयां की पीठ ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें विशिष्ट प्रदर्शन (Specific Performance) की डिक्री के विरुद्ध दायर अपील को केवल इस आधार पर समाप्त घोषित कर दिया गया था कि मृत विक्रेता के एक विधिक उत्तराधिकारी का प्रतिस्थापन नहीं किया गया था, जबकि अन्य विधिक उत्तराधिकारी रिकॉर्ड पर मौजूद थे और मृतक के हित का पर्याप्त प्रतिनिधित्व कर रहे थे।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विधिक उत्तराधिकारियों के प्रतिस्थापन से संबंधित प्रक्रियात्मक नियमों को इस तरह यांत्रिक रूप से लागू नहीं किया जाना चाहिए कि उससे पक्षकारों के मौलिक अधिकारों को क्षति पहुँचे। यदि मृत पक्षकार की संपत्ति और हितों का प्रभावी प्रतिनिधित्व शेष विधिक उत्तराधिकारी कर रहे हों, तो केवल एक उत्तराधिकारी के प्रतिस्थापन के अभाव में कार्यवाही को समाप्त नहीं किया जा सकता।
अदालत ने अपील को बहाल करते हुए यह भी स्पष्ट किया कि न्यायालयों को तकनीकी आपत्तियों पर निर्भर रहने के बजाय यह देखना चाहिए कि क्या मृत पक्षकार का हित वास्तविक रूप से कार्यवाही में सुरक्षित और प्रतिनिधित्वित है या नहीं।


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