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बीमा कंपनी पहले मृतक के आश्रितों / दावेदारों को मुआवज़ा राशि का भुगतान करेगी और उसके बाद वह राशि वाहन स्वामी से वसूल करेगी। Suprim Court


हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा कि यदि किसी मालवाहक वाहन (Goods Vehicle) में यात्रा कर रहे यात्री के दुर्घटना में घायल या मृत होने की स्थिति में बीमा कंपनी सीधे तौर पर मुआवजा देने के लिए उत्तरदायी नहीं भी हो, तब भी न्यायालय उसे पहले दावा करने वालों (क्लेमंट्स) को मुआवजा राशि अदा करने और बाद में वाहन स्वामी से वह राशि वसूल करने का निर्देश दे सकता है—बशर्ते वाहन को मुख्य रूप से माल ढोने के लिए किराए पर लिया गया हो और यात्रा केवल सहायक (incidental) हो।

न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की पीठ ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) के उस आदेश को बहाल कर दिया, जिसमें बीमा कंपनी को पहले मुआवजा अदा करने और बाद में वाहन मालिक से राशि वसूल करने का निर्देश दिया गया था। यह मामला गणेश प्रतिमा विसर्जन के लिए किराए पर लिए गए एक मालवाहक वाहन से संबंधित घातक दुर्घटना से जुड़ा था।

न्यायालय ने कहा:


वर्तमान मामले में मृतक गणेश प्रतिमा के साथ उक्त टेंपो में सवार था, जिसे नर्मदा नदी में विसर्जन के लिए ले जाया जा रहा था। अतः वाहन किराए पर लेने का मुख्य उद्देश्य यात्रा करना नहीं बल्कि गणेश प्रतिमा को विसर्जन के लिए ले जाना था। वाहन में यात्रा करना केवल सहायक था। इसलिए अधिकतम यह कहा जा सकता है कि मृतक अपने सामान (गणेश प्रतिमा) के साथ एक अनुग्रहित (gratuitous) यात्री था।

मामले के तथ्य

यह मामला एक घातक दुर्घटना से उत्पन्न हुआ, जिसमें मृतक गणेश विसर्जन के अवसर पर प्रतिमा को नर्मदा नदी तक ले जाने के लिए किराए पर लिए गए टेंपो में सवार था। दुर्घटना की तिथि पर वह वाहन The Oriental Insurance Company Limited के साथ बीमित था।

11 जनवरी 2010 को अधिकरण ने दावा करने वालों को ₹13,23,000 का मुआवजा प्रदान किया और बीमा कंपनी को निर्देश दिया कि वह पहले राशि जमा करे और बाद में वाहन स्वामी से वसूले।

बीमा कंपनी ने इस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी। उच्च न्यायालय ने अधिकरण के आदेश को निरस्त करते हुए कहा कि बीमा कंपनी को पहले भुगतान करने और बाद में वसूली करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट में दलीलें

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दावा करने वालों ने तर्क दिया कि यदि मृतक मालवाहक वाहन में एक अनुग्रहित यात्री था, तब भी बीमाकर्ता को पहले मुआवजा देने और बाद में मालिक से वसूली करने का निर्देश दिया जा सकता है।

दूसरी ओर, बीमा कंपनी ने Amudhavalli & Ors. v. HDFC Ergo General Insurance Company Ltd. & Ors. के निर्णय पर भरोसा करते हुए कहा कि जब कोई व्यक्ति किराए पर लिए गए मालवाहक वाहन में यात्रा कर रहा हो, तो बीमाकर्ता को “पे एंड रिकवर” (Pay and Recover) के आधार पर भी उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट का निर्णय

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि मृतक गणेश प्रतिमा के साथ टेंपो में यात्रा कर रहा था और वाहन किराए पर लेने का प्रमुख उद्देश्य प्रतिमा को विसर्जन के लिए ले जाना था, न कि यात्रा करना। इसलिए यात्रा केवल सहायक थी। अतः मृतक को अधिकतम अपने सामान (गणेश प्रतिमा) के साथ यात्रा करने वाला अनुग्रहित यात्री माना जा सकता है।

न्यायालय ने Manuara Khatun & Ors. v. Rajesh Kumar Singh & Ors. के निर्णय पर भरोसा किया, जिसमें बीमाकर्ता को पहले मुआवजा अदा करने और उसी कार्यवाही में बीमित (वाहन स्वामी) से राशि वसूल करने का निर्देश दिया गया था। न्यायालय ने Amudhavalli मामले को तथ्यों के आधार पर अलग बताया, क्योंकि उस मामले में वाहन यात्रा के लिए किराए पर लिया गया था, न कि माल ढोने के लिए।

अंततः सुप्रीम कोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए उच्च न्यायालय का आदेश निरस्त कर दिया और अधिकरण का मूल आदेश बहाल कर दिया।

मामला संख्या – SLP (Civil) No. 21802/2023


मामले का शीर्षक – Kaminiben & Ors. v. Oriental Insurance Company Limited & Ors.

 
 
 

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