क्या Meta के विरुद्ध भारत में IT Act एवं BNS के अंतर्गत आपराधिक कार्रवाई संभव है?
- Advocate Sandeep Pandey
- Aug 6
- 2 min read
कानूनी विश्लेषण
लेखक: अधिवक्ता संदीप पांडेय
सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म भारत में "Intermediary" के रूप में कार्य करते हैं। उन्हें आईटी अधिनियम, 2000 की धारा 79 के तहत सीमित "Safe Harbour" (सीमित कानूनी सुरक्षा) प्राप्त होती है। यह सुरक्षा तभी तक उपलब्ध रहती है जब प्लेटफ़ॉर्म कानून द्वारा निर्धारित "Due Diligence" का पालन करे। यदि वह ऐसा नहीं करता, तो यह सुरक्षा समाप्त हो सकती है और अन्य लागू कानूनों के अंतर्गत कार्रवाई की जा सकती है।
1. धारा 79, IT Act – Safe Harbour
धारा 79 के अनुसार यदि इंटरमीडियरी:
स्वयं अवैध सामग्री का निर्माण या चयन नहीं करता,
कानून के अनुसार उचित सावधानी बरतता है,
और सक्षम प्राधिकारी या न्यायालय के निर्देश मिलने पर अवैध सामग्री को समय पर हटाता है,
तो उसे तृतीय-पक्ष सामग्री के लिए सीमित कानूनी सुरक्षा मिल सकती है। यदि वह अवैध कार्य में सहयोग करता है या आवश्यक कार्रवाई नहीं करता, तो यह सुरक्षा समाप्त हो सकती है।
2. IT Rules, 2021 के दायित्व
IT Rules, 2021 के अनुसार सोशल मीडिया इंटरमीडियरी पर कई कानूनी दायित्व हैं, जिनमें शामिल हैं:
अवैध, अश्लील, यौन-शोषणकारी या कानून-विरुद्ध सामग्री के विरुद्ध उचित कार्रवाई।
वैध सरकारी या न्यायिक आदेशों के अनुपालन में समयबद्ध कार्रवाई।
शिकायत निवारण प्रणाली एवं अन्य Due Diligence उपायों का पालन।
MeitY ने भी स्पष्ट किया है कि यदि इंटरमीडियरी इन दायित्वों का पालन नहीं करता, तो धारा 79 की सुरक्षा समाप्त हो सकती है और IT Act तथा BNS सहित अन्य कानूनों के तहत कार्रवाई संभव है।
3. क्या Meta के विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई हो सकती है?
यदि किसी विशेष मामले में जांच एजेंसी यह साक्ष्य एकत्र करती है कि:
कंपनी ने जानबूझकर अवैध सामग्री को बढ़ावा दिया,
या कानूनन आवश्यक कार्रवाई नहीं की,
या किसी अपराध में सहयोग या प्रोत्साहन दिया,
तो संबंधित प्रावधानों के तहत जांच और अभियोजन हो सकता है। लेकिन यह प्रत्येक मामले के तथ्यों, उपलब्ध साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। केवल आरोप या समाचार रिपोर्ट अपने-आप अपराध सिद्ध नहीं करते।
4. BNS के संभावित प्रावधान
मामले के तथ्यों के आधार पर BNS की विभिन्न धाराएँ लागू हो सकती हैं, यदि उनके आवश्यक कानूनी तत्व (ingredients) पूरे होते हों। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि आरोप किस प्रकार के हैं—जैसे अश्लील सामग्री, धोखाधड़ी, मानहानि, उकसावा या अन्य अपराध।
5. निष्कर्ष
भारतीय कानून सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म को पूर्ण छूट नहीं देता। यदि कोई इंटरमीडियरी IT Act और IT Rules के तहत अपने वैधानिक दायित्वों का पालन नहीं करता, तो वह धारा 79 की सुरक्षा खो सकता है और उसके विरुद्ध अन्य लागू कानूनों के अंतर्गत कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि किसी कंपनी या उसके अधिकारी द्वारा अपराध किया गया है या नहीं, इसका अंतिम निर्णय केवल सक्षम न्यायालय ही उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर करता है।
लेखक:
अधिवक्ता संदीप पांडेय



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