छात्रों से अपील: किसी भी गैरकानूनी दंगे, हिंसक प्रदर्शन या कानून-विरुद्ध गतिविधि का हिस्सा न बनें। ऐसे मामलों में अपराध की प्रकृति के अनुसार 10 वर्ष या उससे अधिक कारावास तक का प्रावधान हो सकता है।
अपने भविष्य, शिक्षा और करियर को जोखिम में न डालें।

जंतर-मंतर या किसी भी स्थान पर प्रदर्शन करने वाले सभी छात्रों और युवाओं से मेरी अपील है कि वे किसी भी आंदोलन में शामिल होने से पहले उसके उद्देश्य, कानूनी स्थिति और संभावित परिणामों को अच्छी तरह समझ लें।
भारत का संविधान शांतिपूर्ण और विधिसम्मत विरोध का अधिकार देता है, लेकिन हिंसा, सरकारी या निजी संपत्ति को नुकसान पहुँचाना, पुलिस या सुरक्षा बलों पर हमला करना तथा कानून-व्यवस्था भंग करना दंडनीय अपराध हो सकता है।
यदि किसी हिंसक घटना में किसी व्यक्ति की पहचान सीसीटीवी फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग, डिजिटल साक्ष्य, मोबाइल डेटा, सोशल मीडिया पोस्ट, फिंगरप्रिंट, फेस रिकग्निशन जैसी तकनीकों या अन्य वैधानिक जांच के माध्यम से होती है, तो उसके विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। आधुनिक जांच एजेंसियाँ डिजिटल साक्ष्यों और वैज्ञानिक जांच तकनीकों का व्यापक उपयोग कर रही हैं।
किसी भी आपराधिक प्रकरण का प्रभाव भविष्य में पुलिस सत्यापन, पासपोर्ट, कुछ सरकारी नौकरियों, सुरक्षा संबंधी पदों तथा कुछ निजी संस्थानों के बैकग्राउंड वेरिफिकेशन पर पड़ सकता है। इसलिए कानून का पालन करना और अपने भविष्य को सुरक्षित रखना प्रत्येक छात्र की जिम्मेदारी है।
विशेष रूप से छात्रों से मेरा अनुरोध है कि किसी भी ऐसे प्रदर्शन का हिस्सा न बनें जो हिंसक हो, सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुँचाए या कानून का उल्लंघन करता हो। अपने करियर, परिवार और भविष्य को क्षणिक आवेश में जोखिम में न डालें।
अधिक जानकारी और कानूनी जागरूकता के लिए विजिट करें:
— एडवोकेट संदीप पांडेय



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