टेक्नोलॉजी गड़बड़ी से गलती से मिले ₹40 करोड़ मार्जिन से 20 मिनट में ₹1.75 करोड़ कमाने वाले F&O ट्रेडर को बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुनाफा रखने की अनुमति दी — जानिए क्यों
- Advocate Sandeep Pandey
- Jan 2
- 3 min read

सार (Synopsis)
₹40 करोड़ के मार्जिन में आई तकनीकी गड़बड़ी से F&O ट्रेडर ने 20 मिनट में ₹1.75 करोड़ कमाए; बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा— वह मुनाफा रख सकता है।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि तकनीकी खामी के कारण गलती से उपलब्ध कराए गए मार्जिन मनी का उपयोग कर ट्रेडर द्वारा कमाया गया मुनाफा ट्रेडर का ही होगा, ब्रोकर का नहीं। यह एक अंतरिम (Interim) निर्णय है।
अंतिम अपडेट: 02 जनवरी 2026, सुबह 07:02 बजे (IST)
बॉम्बे हाईकोर्ट का आदेश
3 दिसंबर 2025 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने निर्णय दिया कि ब्रोकर की प्रणाली में तकनीकी खामी के कारण गलती से दिए गए ट्रेड मार्जिन का उपयोग कर स्टॉक ट्रेडर द्वारा कमाए गए मुनाफे को “अनुचित समृद्धि (Unjust Enrichment)” नहीं माना जा सकता।
यह आदेश अंतरिम है क्योंकि 24 दिसंबर 2025 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्टॉक ब्रोकर (कोटक सिक्योरिटीज) की अपील स्वीकार करते हुए 4 फरवरी 2026 को उनकी दलीलें सुनने का निर्णय लिया।
24 दिसंबर 2025 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा:“मामले को 4 फरवरी 2026 को सूचीबद्ध किया जाए। तब तक वाणिज्यिक मध्यस्थता याचिका संख्या 788/2024 के पैरा 35 के तहत सिंगल जज द्वारा पारित अंतरिम आदेश प्रभावी रहेगा।”
मामले के तथ्य
इस मामले में, एक तकनीकी गड़बड़ी के कारण ट्रेडर को ₹40 करोड़ का मार्जिन दिखाया गया। उसने इस मार्जिन का उपयोग कर फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) में ट्रेडिंग की और केवल 20 मिनट में ₹1.75 करोड़ का शुद्ध मुनाफा कमाया।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने माना कि ट्रेडर को जो मार्जिन उपलब्ध दिखाया गया, उसी के आधार पर उसने अपनी कौशल और जोखिम उठाने की क्षमता से F&O ट्रेड किए। इसलिए मुनाफा ट्रेडर का है, न कि स्टॉक ब्रोकर का।
कोटक सिक्योरिटीज की दलील
कोटक सिक्योरिटीज ने तर्क दिया कि ₹40 करोड़ का मार्जिन गलती से क्रेडिट हुआ था, इसलिए उस धन से हुआ कोई भी मुनाफा उनका होना चाहिए।
इस पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि केवल मार्जिन उपलब्ध हो जाने से स्वतः मुनाफा नहीं होता। वास्तव में, ट्रेडर को पहले ₹54 लाख का नुकसान हुआ, इसके बाद उसे ₹2.38 करोड़ का लाभ हुआ, जिससे कुल मिलाकर ₹1.75 करोड़ का शुद्ध मुनाफा हुआ।
अदालत ने यह भी कहा कि कोटक सिक्योरिटीज को इस गलत मार्जिन के कारण कोई नुकसान नहीं हुआ। इसके बावजूद वे ट्रेडर की मेहनत, कौशल और जोखिम से कमाए गए मुनाफे को अपने पास रखना चाहते थे, जो अनुचित है।
कोर्ट की अहम टिप्पणियाँ
यदि उलटी स्थिति होती और ट्रेडर को नुकसान होता, तो कोटक सिक्योरिटीज केवल यह कहकर नुकसान माफ नहीं करती कि मार्जिन गलती से दिया गया था।
कोटक सिक्योरिटीज अपने ही किए गए गलती से स्वयं को समृद्ध (enrich) करना चाहती है।
केवल अवसर मिलना मुनाफे की गारंटी नहीं होता।
यदि नुकसान होता, तो ट्रेडर को उसकी भरपाई करनी पड़ती।
ऐसा नहीं हो सकता कि ट्रेडर केवल नुकसान के लिए जिम्मेदार हो, लेकिन मुनाफा रखने की अनुमति न दी जाए।
जोखिम प्रबंधन (Risk Management) पर कोर्ट की राय
कोर्ट ने कहा कि कोटक सिक्योरिटीज जोखिम प्रबंधन प्रणाली की पवित्रता की बात तो कर रही है, लेकिन:
पहले उन्होंने ट्रेडर को ₹50 लाख देकर समझौता करने की कोशिश की।
बाद में वे पूरे मुनाफे पर दावा करने लगे।
उन्होंने समय पर जोखिम नियंत्रण प्रोटोकॉल लागू नहीं किए।
ट्रेड निष्पादन के बाद कॉन्ट्रैक्ट नोट जारी किए, शुल्क वसूले और लाभ क्रेडिट भी किया।
F&O ट्रेड कैसे हुआ?
राजगुरु ने अक्टूबर 2021 में कोटक सिक्योरिटीज के साथ ट्रेडिंग एवं डीमैट खाता खोला।
26 जुलाई 2022 को उनके खाते में मात्र ₹3,175.69 थे।
तकनीकी गड़बड़ी से खाते में भारी मार्जिन दिखने लगा।
उन्होंने 20 मिनट में लगभग ₹94.81 करोड़ के F&O सौदे किए।
इस ट्रेड के लिए ₹40 करोड़ मार्जिन चाहिए था, जो उनके पास वास्तव में नहीं था।
शाम को उन्हें कॉन्ट्रैक्ट नोट मिला और ₹1.83 करोड़ खाते में क्रेडिट हुए।
बाद में कोटक सिक्योरिटीज ने ₹1.75 करोड़ रिवर्स कर दिए।
कानूनी लड़ाई का क्रम
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कोटक सिक्योरिटीज को ₹1.75 करोड़ + 12% ब्याज लौटाने का आदेश
कोटक सिक्योरिटीज ने बॉम्बे हाईकोर्ट में अपील की
3 दिसंबर 2025 को ट्रेडर की जीत हुई
कोर्ट का अंतिम निष्कर्ष
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा:
यह कोटक सिक्योरिटीज की प्रणाली की विफलता थी।
ट्रेडर ने कोई चोरी या धोखाधड़ी नहीं की।
ट्रेडर ने अपने कौशल और जोखिम से लाभ कमाया।
यदि केवल एक पक्ष को मुनाफा रखने की अनुमति दी जानी है, तो वह ट्रेडर होगा, ब्रोकर नहीं।
अदालत ने कोटक सिक्योरिटीज की याचिका खारिज कर दी और ट्रेडर को पूरी राशि व ब्याज निकालने की अनुमति दी।


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