पंचनामा (Inquest Report) में आरोपी का नाम न होना जमानत का आधार नहीं: सुप्रीम कोर्ट
- Advocate Sandeep Pandey
- Jul 4
- 1 min read
✍️ एडवोकेट संदीप पांडे
एक महत्वपूर्ण फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पंचनामा (Inquest Report) में आरोपी का नाम न होना मात्र इस आधार पर जमानत देने का कारण नहीं बन सकता, यदि जांच के दौरान एकत्र अन्य साक्ष्य प्रथम दृष्टया आरोपी की संलिप्तता दर्शाते हों।
सुप्रीम कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियाँ
पंचनामा (Inquest Report) का उद्देश्य केवल मृत्यु के कारण और परिस्थितियों का प्रारंभिक रिकॉर्ड तैयार करना होता है।
पंचनामा का उद्देश्य अपराधी की पहचान करना या पूरी घटना का विवरण दर्ज करना नहीं है।
यदि केस डायरी, गवाहों के बयान, बरामदगी या अन्य साक्ष्य आरोपी की भूमिका की ओर संकेत करते हैं, तो केवल पंचनामा में नाम न होने के आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या किया?
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा हत्या के एक आरोपी को दी गई जमानत का आदेश निरस्त करते हुए कहा कि जमानत पर निर्णय करते समय उपलब्ध समस्त साक्ष्यों और मामले की गंभीरता पर विचार किया जाना चाहिए, न कि केवल पंचनामा में नाम के अभाव पर।
कानूनी महत्व
BNSS, 2023 की धारा 194 (पूर्व CrPC की धारा 174) के अंतर्गत होने वाली पंचनामा कार्यवाही का दायरा सीमित है।
पंचनामा में आरोपी का नाम न होना आरोपी की बेगुनाही का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
जमानत का निर्णय न्यायालय उपलब्ध साक्ष्यों, आरोपों की गंभीरता और स्थापित कानूनी सिद्धांतों के आधार पर करेगा।
✍️ Advocate Sandeep Pandey
Criminal & Constitutional Law





Comments