top of page

"महिला के प्रति अशोभनीय टिप्पणी".पूर्व तमिलनाडु मुख्यमंत्री स्टालिन की गिरफ्तारी.


लेखक: एडवोकेट संदीप पांडे

हाल ही में तमिलनाडु में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन को मुख्यमंत्री विजय तथा एक महिला अभिनेत्री के संबंध में कथित आपत्तिजनक एवं दोहरे अर्थ (sexually coloured) वाली सार्वजनिक टिप्पणी के मामले में पुलिस ने गिरफ्तार किया। बाद में उनसे पूछताछ की गई और उन्हें स्टेशन बेल प्रदान की गई। इस घटना ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि सार्वजनिक मंचों, राजनीतिक भाषणों और सोशल मीडिया पर महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाले कथनों को भारतीय कानून किस दृष्टि से देखता है।

महिलाओं की गरिमा सर्वोपरि

भारत का संविधान प्रत्येक व्यक्ति, विशेषकर महिलाओं, की गरिमा और सम्मान की रक्षा करता है। किसी महिला के बारे में अश्लील, अपमानजनक, यौन संकेत देने वाली या उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने वाली सार्वजनिक टिप्पणी केवल नैतिक रूप से ही नहीं, बल्कि कई परिस्थितियों में आपराधिक दायित्व भी उत्पन्न कर सकती है।

यदि किसी भाषण, वीडियो, पोस्ट या सार्वजनिक बयान में महिला की मर्यादा पर हमला किया जाता है, तो उसके तथ्यों के आधार पर विभिन्न कानूनी प्रावधान लागू हो सकते हैं।

मानहानि (Defamation)

यदि किसी व्यक्ति के बारे में ऐसा कथन किया जाए जिससे उसकी प्रतिष्ठा को क्षति पहुँचे, तो भारतीय न्याय संहिता (BNS) में मानहानि से संबंधित प्रावधान लागू हो सकते हैं। यदि कथित टिप्पणी किसी सार्वजनिक व्यक्ति या महिला की प्रतिष्ठा को प्रभावित करती है, तो शिकायत के आधार पर आपराधिक कार्यवाही प्रारंभ हो सकती है।

महिलाओं की लज्जा एवं गरिमा से जुड़े अपराध

यदि कथित बयान अश्लील, यौन संकेत देने वाला या महिला की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाला माना जाता है, तो मामले के तथ्यों के अनुसार महिलाओं की गरिमा की रक्षा करने वाले प्रावधान, सूचना प्रौद्योगिकी कानून के प्रावधान (यदि सामग्री डिजिटल माध्यम से प्रसारित हुई हो) तथा अन्य लागू विशेष कानून भी लगाए जा सकते हैं।

यह ध्यान रखना आवश्यक है कि कौन-कौन सी धाराएँ लागू होंगी, इसका निर्णय पुलिस और न्यायालय उपलब्ध साक्ष्यों, शिकायत तथा कथित कथनों की वास्तविक सामग्री के आधार पर करते हैं।

गिरफ्तारी की गंभीरता

उदयनिधि स्टालिन प्रकरण यह दर्शाता है कि यदि पुलिस को प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध का आधार दिखाई देता है, तो वह जांच, पूछताछ और आवश्यकता पड़ने पर गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई कर सकती है। हालांकि गिरफ्तारी का अर्थ दोष सिद्ध होना नहीं है। अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही किया जाता है।


भारत में भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) के अंतर्गत मानहानि (Defamation) का प्रावधान:


धारा 356 — मानहानि (Defamation)


किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य से या यह जानते हुए कि उससे उसकी प्रतिष्ठा को क्षति पहुँचेगी, कथन, लेख, संकेत या दृश्य प्रस्तुति के माध्यम से आरोप लगाना मानहानि हो सकता है।


धारा में कुछ अपवाद (Exceptions) भी हैं, जैसे लोकहित में सत्य कथन, सद्भावना में की गई आलोचना, न्यायिक कार्यवाही से संबंधित टिप्पणियाँ आदि।




दंड:


साधारण कारावास (सरल कारावास), या


जुर्माना, या


दोनों।



यह ध्यान रखें कि किसी मामले में वास्तव में धारा 356 लागू होगी या नहीं, यह कथन की प्रकृति, उसके संदर्भ, उपलब्ध साक्ष्यों तथा धारा में दिए गए अपवादों पर निर्भर करता है। यदि कथन किसी महिला की गरिमा, अश्लीलता या यौन उत्पीड़न से भी संबंधित हो, तो मामले के तथ्यों के अनुसार BNS की अन्य धाराएँ या सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के प्रावधान भी लागू हो सकते हैं।

सोशल मीडिया पर भी समान जिम्मेदारी

आज फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स, यूट्यूब या अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर की गई पोस्ट, वीडियो, रील या लाइव प्रसारण भी कानूनी जांच के दायरे में आते हैं। यदि कोई व्यक्ति किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाली सामग्री प्रकाशित या प्रसारित करता है, तो उसके विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई संभव है।

निष्कर्ष

लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एक महत्वपूर्ण अधिकार है, लेकिन यह अधिकार असीमित नहीं है। किसी महिला की गरिमा, किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा तथा सार्वजनिक शालीनता का उल्लंघन करने वाले कथन कानूनी विवाद का कारण बन सकते हैं।

उदयनिधि स्टालिन प्रकरण यह संदेश देता है कि सार्वजनिक जीवन में कार्यरत नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों तथा सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं को अपनी भाषा और अभिव्यक्ति में संयम रखना चाहिए। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत सम्मान के बीच संतुलन बनाए रखना ही विधि का मूल उद्देश्य है।

— एडवोकेट संदीप पांडे


 
 
 

Comments


Gopal Nagar,3rd Bus Stop, Nagpur -440022

Call : 0091-9372390048

Whatsapp 9372390048

© 2023 by

Advisor & co.

Proudly created by Advocate Sandeep Pandey

  • facebook
  • Twitter Clean
  • Instagram
  • Blogger
bottom of page