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कांग्रेस की धीमी आर्थिक नीतियों से मोदी सरकार के तेज विकास मॉडल तक: भारत की आर्थिक यात्रा


लेखक: अधिवक्ता संदीप पांडेय

भारत की अर्थव्यवस्था का इतिहास केवल आंकड़ों की कहानी नहीं है, बल्कि नीतियों, नेतृत्व और दूरदर्शिता का भी प्रतिबिंब है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 1950 में भारत की अर्थव्यवस्था लगभग 21.3 लाख करोड़ रुपये थी, जो 2025 तक बढ़कर लगभग 384 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है। हालांकि यह वृद्धि हुई, लेकिन प्रश्न यह है कि क्या भारत अपनी क्षमता के अनुरूप विकसित हुआ?

मेरे विचार में, स्वतंत्रता के बाद कई दशकों तक कांग्रेस की आर्थिक नीतियां देश की वास्तविक क्षमता को गति देने में सफल नहीं रहीं। इसके विपरीत, भाजपा सरकार के दौरान आर्थिक सुधारों, डिजिटल क्रांति और बुनियादी ढांचे पर निवेश ने भारत को अधिक तेज़ी से आगे बढ़ाने का प्रयास किया।

कांग्रेस शासन: नियंत्रण आधारित अर्थव्यवस्था

स्वतंत्रता के बाद कांग्रेस ने समाजवादी मॉडल अपनाया। सरकार ने उद्योगों, व्यापार और निवेश पर व्यापक नियंत्रण रखा।

इसके परिणामस्वरूप:

  • लाइसेंस राज और परमिट प्रणाली ने उद्यमिता को सीमित किया।

  • निजी निवेश को पर्याप्त प्रोत्साहन नहीं मिला।

  • उद्योग स्थापित करने के लिए अत्यधिक सरकारी अनुमति की आवश्यकता होती थी।

  • आर्थिक विकास की गति अपेक्षाकृत धीमी रही।

ग्राफ के अनुसार 1970 के दशक में भारत की GDP वृद्धि दर लगभग 3.75% से 5% के बीच थी। 1980 और 1990 के दशकों में भी वृद्धि दर सीमित रही। जबकि इसी अवधि में चीन ने आक्रामक औद्योगिकीकरण और निर्यात आधारित मॉडल अपनाकर कहीं अधिक तेज़ विकास हासिल किया।

यदि भारत ने शुरुआती दशकों में अधिक प्रतिस्पर्धी और निवेश समर्थक नीतियां अपनाई होतीं, तो संभवतः आज भारत और चीन के बीच आर्थिक अंतर इतना बड़ा नहीं होता।

1991 के बाद सुधार, लेकिन गति सीमित

1991 के आर्थिक संकट ने भारत को आर्थिक उदारीकरण की ओर बढ़ने के लिए मजबूर किया।

हालांकि सुधार शुरू हुए, लेकिन:

  • श्रम सुधारों में सीमित प्रगति हुई।

  • विनिर्माण क्षेत्र अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सका।

  • बुनियादी ढांचे में निवेश की गति पर्याप्त नहीं रही।

परिणामस्वरूप चीन लगातार भारत से आगे निकलता गया।

भाजपा सरकार और विकास का नया दृष्टिकोण

2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा सरकार बनने के बाद आर्थिक विकास के लिए नई पहलें शुरू की गईं।

प्रमुख सुधार

  • Make in India

  • Digital India

  • GST

  • Startup India

  • Jan Dhan Yojana

  • UPI आधारित डिजिटल भुगतान

  • PLI योजना

  • एक्सप्रेसवे, रेलवे और हवाई अड्डों का विस्तार

इन पहलों ने अर्थव्यवस्था को औपचारिक बनाने और निवेश को बढ़ाने का प्रयास किया।

भारत ने विकास दर में चीन को पीछे छोड़ा

ग्राफ के अनुसार:

वर्ष

भारत GDP Growth

चीन GDP Growth

2025-26

7.7%

4.4%

यह दर्शाता है कि वर्तमान समय में भारत की आर्थिक वृद्धि दर चीन से अधिक है।

यद्यपि कुल GDP आकार में चीन अभी भी भारत से बड़ा है, लेकिन विकास दर के मामले में भारत की स्थिति मजबूत दिखाई देती है।

मोदी सरकार के दौरान प्रमुख उपलब्धियां

  • भारत विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ।

  • डिजिटल भुगतान में भारत वैश्विक नेतृत्व की स्थिति में पहुंचा।

  • रिकॉर्ड स्तर पर सड़क, रेलवे और हवाई अड्डा निर्माण हुआ।

  • विदेशी निवेश आकर्षित करने के प्रयास बढ़े।

  • भारत विश्व की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ।

निष्कर्ष

मेरे विचार में कांग्रेस शासन के दौरान भारत ने आर्थिक आधार अवश्य बनाया, लेकिन नीतिगत नियंत्रण, लाइसेंस राज और धीमे सुधारों के कारण देश अपनी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं कर पाया। दूसरी ओर, भाजपा सरकार ने आर्थिक सुधार, डिजिटल परिवर्तन, अवसंरचना विकास और निवेश आकर्षित करने की दिशा में अधिक आक्रामक दृष्टिकोण अपनाया है।

हालांकि किसी भी सरकार के योगदान का मूल्यांकन केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं बल्कि दीर्घकालिक आर्थिक आंकड़ों, वैश्विक परिस्थितियों और नीतिगत प्रभावों के आधार पर किया जाना चाहिए। फिर भी, उपलब्ध ग्राफ और वर्तमान वृद्धि दर के आधार पर यह कहा जा सकता है कि भारत आज पहले की तुलना में अधिक तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में उभर रहा है।

— अधिवक्ता संदीप पांडेय

Legal Analyst & Public Policy Observer ,Nagpur, Maharashtra

 
 
 

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