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सरकारी रिकॉर्ड गुम होने पर नागरिक को संपत्ति अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता : मध्यप्रदेश हाईकोर्ट


मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि यदि सरकारी अभिलेख (Records) गुम हो जाएं या उपलब्ध न हों, तो केवल इस आधार पर किसी नागरिक को उसकी संपत्ति के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। संविधान के अनुच्छेद 300A के तहत संपत्ति का अधिकार एक संवैधानिक अधिकार है और किसी व्यक्ति को उसकी संपत्ति से केवल विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही वंचित किया जा सकता है।

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सरकारी विभागों की लापरवाही, रिकॉर्ड के नष्ट होने या अभिलेखों के गायब हो जाने का खामियाजा नागरिकों को नहीं भुगतना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति के पास अपने स्वामित्व या कब्जे को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य हैं, तो प्रशासन केवल रिकॉर्ड उपलब्ध न होने का बहाना बनाकर उसके अधिकारों को समाप्त नहीं कर सकता।

हाईकोर्ट ने यह भी दोहराया कि संपत्ति का अधिकार भले ही अब मौलिक अधिकार नहीं है, लेकिन यह अभी भी संविधान द्वारा संरक्षित एक महत्वपूर्ण संवैधानिक अधिकार है। राज्य या उसके अधिकारी बिना वैधानिक अधिकार और उचित प्रक्रिया अपनाए किसी व्यक्ति को उसकी संपत्ति से वंचित नहीं कर सकते।

यह निर्णय उन हजारों नागरिकों के लिए राहतकारी है जो वर्षों पुराने भूमि अभिलेखों, राजस्व रिकॉर्ड या सरकारी दस्तावेजों के गुम हो जाने के कारण अपनी संपत्ति पर अधिकार सिद्ध करने में कठिनाइयों का सामना करते हैं। न्यायालय का संदेश स्पष्ट है कि प्रशासनिक त्रुटियां नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों को समाप्त नहीं कर सकतीं।

— एडवोकेट संदीप पांडे


 
 
 

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