धारा 53A टी.पी. एक्ट के तहत कब्जे की सुरक्षा पाने के लिए विक्रय अनुबंध (Agreement to Sell) का पंजीकृत होना आवश्यक : दिल्ली हाईकोर्ट
- Advocate Sandeep Pandey
- 2 hours ago
- 2 min read
दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट, 1882 की धारा 53A (Part Performance Doctrine) के तहत अपने कब्जे की सुरक्षा का दावा करना चाहता है, तो उसके पास मौजूद Agreement to Sell का विधिवत पंजीकृत (Registered) होना अनिवार्य है। केवल अपंजीकृत (Unregistered) अनुबंध के आधार पर धारा 53A का लाभ नहीं लिया जा सकता।
क्या है धारा 53A?
धारा 53A का उद्देश्य ऐसे खरीदार की सुरक्षा करना है जिसने किसी संपत्ति को खरीदने के लिए लिखित अनुबंध किया हो, अनुबंध के पालन में कब्जा प्राप्त कर लिया हो तथा अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के लिए तैयार हो। ऐसी स्थिति में विक्रेता खरीदार को केवल तकनीकी आधार पर बेदखल नहीं कर सकता।
दिल्ली हाईकोर्ट ने क्या कहा?
न्यायालय ने कहा कि पंजीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 17(1A) के अनुसार धारा 53A से संबंधित अनुबंधों का पंजीकरण अनिवार्य है। यदि Agreement to Sell पंजीकृत नहीं है, तो उसे धारा 53A के तहत कब्जे की सुरक्षा के लिए साक्ष्य के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
अदालत ने यह भी दोहराया कि Agreement to Sell स्वयं स्वामित्व (Ownership) हस्तांतरित नहीं करता। संपत्ति का स्वामित्व केवल विधिवत पंजीकृत विक्रय विलेख (Sale Deed) से ही स्थानांतरित होता है।
निर्णय का महत्व
यह फैसला उन लोगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है जो केवल Agreement to Sell के आधार पर संपत्ति पर अधिकार या कब्जे की सुरक्षा का दावा करते हैं। न्यायालय ने स्पष्ट संदेश दिया है कि:
अपंजीकृत Agreement to Sell से धारा 53A का संरक्षण नहीं मिलेगा।
केवल Agreement to Sell से स्वामित्व प्राप्त नहीं होता।
संपत्ति संबंधी लेन-देन में पंजीकरण की कानूनी प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है।
खरीदार को अपने अधिकार सुरक्षित रखने के लिए दस्तावेजों का विधिवत पंजीकरण कराना चाहिए।
निष्कर्ष
दिल्ली हाईकोर्ट का यह निर्णय संपत्ति कानून में पंजीकरण के महत्व को पुनः स्थापित करता है। यदि कोई व्यक्ति धारा 53A के तहत कब्जे की सुरक्षा चाहता है, तो उसके पास पंजीकृत Agreement to Sell होना आवश्यक है। अन्यथा वह इस कानूनी संरक्षण का लाभ नहीं उठा सकेगा।
लेखक: एडवोकेट संदीप पाण्डेय
वेबसाइट: www.advpandey.com





Comments