दिव्यांग अधिकार कानून की जमीनी हकीकत जांचेगी देश की 8 NLUs, सुप्रीम कोर्ट ने दी ऐतिहासिक मंजूरी.

Adv. Sandeep Pandey
सुप्रीम कोर्ट ने दिव्यांगजन अधिकार कानून (RPwD Act, 2016) के प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी के लिए देश के 8 नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज़ (NLUs) को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। कोर्ट ने “प्रोजेक्ट एबिलिटी एम्पावरमेंट” के तहत इन NLUs को विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में दिव्यांग व्यक्तियों के लिए संचालित संस्थानों और योजनाओं की स्थिति का आकलन करने की अनुमति दी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि RPwD Act का उद्देश्य केवल कागजी अधिकार देना नहीं, बल्कि दिव्यांग व्यक्तियों को सम्मान, समानता और गरिमा के साथ जीवन सुनिश्चित करना है। अदालत ने यह भी माना कि कई राज्यों में इस कानून का क्रियान्वयन बेहद कमजोर और निराशाजनक है।
न्यायालय ने निर्देश दिया कि यह मॉनिटरिंग टीम विशेष रूप से निम्न बिंदुओं की जांच करेगी—
दिव्यांग व्यक्तियों की देखभाल, स्वास्थ्य और पुनर्वास
संस्थानों में पहुंच और आधारभूत सुविधाएं
शिक्षा और सहायक तकनीकों की उपलब्धता
मानवाधिकार संरक्षण और शिकायत निवारण व्यवस्था
स्टाफ, संसाधन और जवाबदेही
सरकारी योजनाओं और आरक्षण का वास्तविक लाभ
कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को NLUs को पूरा प्रशासनिक और वित्तीय सहयोग देने का आदेश दिया। प्रत्येक NLU को प्रारंभिक रूप से ₹25 लाख की राशि भी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार केवल “सिफारिश” नहीं बल्कि संवैधानिक अधिकार हैं, जिनका प्रभावी पालन सुनिश्चित करना सरकारों की जिम्मेदारी है।



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