पंजीकृत विक्रय विलेख (Sale Deed) को वैध मानने की कानूनी धारणा; गवाहों के विवरण में मामूली त्रुटि से दस्तावेज अमान्य नहीं होगा : सुप्रीम कोर्ट
- Advocate Sandeep Pandey
- 3 hours ago
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सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि पंजीकृत विक्रय विलेख (Registered Sale Deed) को वैध एवं वास्तविक मानने की एक मजबूत कानूनी धारणा (Presumption) होती है। केवल गवाहों (Attesting Witnesses) के विवरण में मामूली विसंगति या तकनीकी त्रुटि के आधार पर उसके निष्पादन (Execution) को अवैध नहीं ठहराया जा सकता।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि किसी दस्तावेज का पंजीकरण मात्र औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह एक गंभीर कानूनी प्रक्रिया है जो दस्तावेज को विश्वसनीयता और वैधता प्रदान करती है। इसलिए, जब तक दस्तावेज को चुनौती देने वाला पक्ष ठोस एवं विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं करता, तब तक पंजीकृत विक्रय विलेख को वैध माना जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी माना कि विक्रय विलेख के संबंध में हर मामले में गवाहों की गवाही अनिवार्य नहीं होती। यदि दस्तावेज विधिवत पंजीकृत है और अन्य साक्ष्य उसके निष्पादन का समर्थन करते हैं, तो केवल गवाहों के विवरण में छोटी-मोटी त्रुटियाँ दस्तावेज को अविश्वसनीय नहीं बनातीं।
निर्णय का महत्व
पंजीकृत विक्रय विलेख को कानून में विशेष संरक्षण प्राप्त है।
गवाहों के नाम, पते या अन्य विवरण में मामूली त्रुटियाँ होने मात्र से दस्तावेज अमान्य नहीं होगा।
दस्तावेज को चुनौती देने वाले पक्ष पर यह साबित करने का भार होगा कि दस्तावेज वास्तव में फर्जी, कपटपूर्ण या अवैध है।
संपत्ति संबंधी विवादों में केवल तकनीकी आधारों पर पंजीकृत दस्तावेजों को निरस्त करने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी।
निष्कर्ष:
सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय से यह सिद्धांत और मजबूत हुआ है कि पंजीकृत विक्रय विलेख की वैधता को केवल गवाहों के विवरण में मामूली विसंगति के आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती। जब तक गंभीर और ठोस साक्ष्य उपलब्ध न हों, ऐसे दस्तावेज को वैध एवं प्रभावी माना जाएगा।





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