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मातृभाषा में शिक्षा पाना बच्चे का मौलिक अधिकार : सुप्रीम कोर्ट


भारत के Supreme Court of India ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत बच्चे को अपनी पसंद की भाषा में प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करने का मौलिक अधिकार है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता केवल बोलने तक सीमित नहीं है, बल्कि जानकारी को समझने और ग्रहण करने के अधिकार को भी शामिल करती है।

न्यायमूर्ति Justice Vikram Nath और Justice Sandeep Mehta की पीठ ने कहा कि शिक्षा उसी भाषा में दी जानी चाहिए जिसे बच्चा आसानी से समझ सके। अदालत के अनुसार मातृभाषा या पसंद की भाषा में शिक्षा देने से बच्चों की समझ, मानसिक विकास और ज्ञान ग्रहण करने की क्षमता बेहतर होती है।

यह टिप्पणी उस मामले में की गई जिसमें Rajasthan सरकार को स्कूलों में राजस्थानी भाषा को विषय के रूप में शुरू करने और उसे शिक्षण माध्यम के तौर पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों में मातृभाषा आधारित शिक्षा को महत्व दिया गया है, लेकिन राज्यों द्वारा इसे प्रभावी रूप से लागू नहीं किया जा रहा है।

अदालत ने अपने पुराने फैसले State of Karnataka v. Associated Management of English Medium Primary & Secondary Schools का हवाला देते हुए कहा कि राज्य किसी बच्चे पर किसी विशेष भाषा को थोप नहीं सकता। बच्चे और उसके अभिभावकों को प्राथमिक शिक्षा की भाषा चुनने की स्वतंत्रता है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि शिक्षा केवल कागजों तक सीमित रह जाए और बच्चों तक उनकी समझ की भाषा में न पहुंचे, तो संवैधानिक अधिकारों का वास्तविक उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता।

 
 
 

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