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सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर कर्नाटक हाईकोर्ट का सख्त संदेश



कर्नाटक हाईकोर्ट ने अभिनेता दर्शन की पत्नी विजयलक्ष्मी दर्शन के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित रूप से अश्लील और अपमानजनक पोस्ट करने के आरोप में गिरफ्तार चार आरोपियों को जमानत देने से इनकार करते हुए सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर कड़ा रुख अपनाया है।

न्यायमूर्ति एस. रचैया ने कहा कि संविधान नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार देता है, लेकिन यह अधिकार किसी व्यक्ति को दूसरे की गरिमा, सम्मान और मानसिक शांति को ठेस पहुंचाने की अनुमति नहीं देता। अदालत ने माना कि सोशल मीडिया पर भय, उत्पीड़न और अपमान फैलाने वाली सामग्री समाज के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।

हाईकोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि सोशल मीडिया मंचों को ऐसी धमकीपूर्ण, अश्लील और उत्पीड़क सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए। अदालत के अनुसार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और ऑनलाइन जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।

यह फैसला उन लोगों के लिए स्पष्ट चेतावनी है जो सोशल मीडिया को किसी व्यक्ति को बदनाम करने, परेशान करने या अश्लील सामग्री प्रसारित करने का माध्यम समझते हैं। अदालत ने संकेत दिया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किया गया दुरुपयोग भी उतना ही गंभीर अपराध है जितना वास्तविक दुनिया में किया गया उत्पीड़न।

कानूनी संदेश:


सोशल मीडिया पर की गई हर पोस्ट, टिप्पणी या साझा की गई सामग्री कानून के दायरे में आती है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार असीमित नहीं है और इसका प्रयोग दूसरों के सम्मान, गोपनीयता तथा कानून की सीमाओं का पालन करते हुए ही किया जाना चाहिए।

 
 
 

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