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Star health insurance द्वारा क्लेम रिजेक्ट पर सेवा में खामी का केस ग्राहक को मिला सम्पूर्ण दवा।


Adv. sandeep pandey

कोविड बीमा दावा सिर्फ 2.5 घंटे कम अस्पताल में भर्ती रहने पर खारिज करना मनमाना — उपभोक्ता आयोग

 ने Star Health and Allied Insurance Company Ltd. को सेवा में कमी (Deficiency in Service) का दोषी ठहराते हुए कहा कि केवल अस्पताल में भर्ती रहने की अवधि 72 घंटे से लगभग 2.5 घंटे कम होने के आधार पर कोविड बीमा दावा खारिज करना मनमाना, अनुचित और कानूनन अस्थिर है।

आयोग की पीठ में सी.टी. साबू (अध्यक्ष), श्रीजा एस. (सदस्य) और राम मोहन आर. (सदस्य) शामिल थे।

मामले के तथ्य

शिकायतकर्ता रॉबिन ए.के. ने स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी से “कोरोना रक्षक पॉलिसी” खरीदी थी, जिसकी बीमित राशि ₹1,00,000 थी। यह पॉलिसी 31 जुलाई 2020 से 12 मई 2021 तक प्रभावी थी और कोविड-19 पॉजिटिव होने पर, कम से कम लगातार 72 घंटे अस्पताल में भर्ती रहने की स्थिति में एकमुश्त बीमा लाभ प्रदान करती थी।

पॉलिसी अवधि के दौरान शिकायतकर्ता कोविड-19 संक्रमित पाए गए और 16 अक्टूबर 2020 को अस्पताल में भर्ती हुए तथा 19 अक्टूबर 2020 को डिस्चार्ज हुए। इसके बाद उन्होंने बीमा दावा प्रस्तुत किया।

हालांकि, बीमा कंपनी ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि शिकायतकर्ता लगभग 70 घंटे ही अस्पताल में भर्ती रहे, जो पॉलिसी में निर्धारित न्यूनतम 72 घंटे की शर्त से कम था।

इससे आहत होकर शिकायतकर्ता ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया और सेवा में कमी का आरोप लगाया।

बीमा कंपनी का पक्ष

बीमा कंपनी ने पॉलिसी जारी होने और शिकायतकर्ता के कोविड संक्रमित होने की बात स्वीकार की, लेकिन यह तर्क दिया कि पॉलिसी की शर्तों के अनुसार न्यूनतम 72 घंटे अस्पताल में भर्ती रहना अनिवार्य था, इसलिए दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता।

आयोग की टिप्पणी

आयोग ने कहा कि शिकायतकर्ता कोविड-19 पॉजिटिव थे और पॉलिसी अवधि के दौरान अस्पताल में भर्ती भी हुए, जिससे पॉलिसी का मूल उद्देश्य पूरा हो गया था।

आयोग ने माना कि 72 घंटे की अनिवार्य अवधि से लगभग 2.5 घंटे की कमी कोई गंभीर या मूलभूत उल्लंघन नहीं माना जा सकता। आयोग ने कहा कि बीमा पॉलिसी की शर्तों को अत्यधिक तकनीकी दृष्टिकोण से लागू नहीं किया जाना चाहिए, जिससे पॉलिसी का उद्देश्य ही विफल हो जाए। बीमा कंपनियों को निष्पक्ष और न्यायसंगत व्यवहार करना चाहिए।

आदेश

आयोग ने बीमा कंपनी द्वारा दावा अस्वीकार करने को मनमाना और अस्थिर बताते हुए शिकायत स्वीकार कर ली। आयोग ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया कि वह शिकायतकर्ता को:

  • ₹1,00,000 बीमित राशि,

  • ₹10,000 मुआवजा,

  • ₹5,000 वाद व्यय,

अदा करे, साथ ही वाद दायर करने की तिथि से भुगतान होने तक 9% वार्षिक ब्याज भी दे।

मामला: Robin A.K. v. Star Health and Allied Insurance Company Ltd.


केस नंबर: CC 159/21

 
 
 

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